कविताओं में तितली का आना
कविताओं में तितली का आना
मेरी कविताओं में
कहीं न कहीं
इतराती फिरती है
एक पीली तितली
शायद कभी न कभी
मचल उठे कोई बालक
और पीछा करते हुए
पहुंच जाए गुलमोहर के जंगलों में !
यही तो चाहती हूं मैं
कि प्रगाढ़ होते रहें संबंध
ऐसे ही
कविता तितली पेड़ों
और
मनुष्यों में
तभी ही फैलेगी हरियाली
धरती पर
और कविताओं में भी !
