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नमिता गुप्ता 'मनसी'

Abstract

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नमिता गुप्ता 'मनसी'

Abstract

कविताओं में तितली का आना

कविताओं में तितली का आना

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मेरी कविताओं में

कहीं न कहीं

इतराती फिरती है

एक पीली तितली


शायद कभी न कभी

मचल उठे कोई बालक

और पीछा करते हुए

पहुंच जाए गुलमोहर के जंगलों में !


यही तो चाहती हूं मैं

कि प्रगाढ़ होते रहें संबंध

ऐसे ही

कविता तितली पेड़ों


और

मनुष्यों में

तभी ही फैलेगी हरियाली

धरती पर 

और कविताओं में भी !


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