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J P Raghuwanshi

Abstract

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J P Raghuwanshi

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कविता

कविता

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बची हुई जिंदगी का

पल-पल मजा लेते हैं।

कभी स्वयं हंसते हैं

औरों को हंसाते हैं।

पता नहीं कब यात्रा रुक जावें

इसीलिए भरपूर जी लेते है।


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