कवि
कवि
एक झूठा प्रकृति का,
मोहक विवरण नहीं है कविता I
न ही उसका रचयिता,
वो है जो प्रकृति के फूलों की गोद,
में पल कर एक संपन्न मनुष्य बनाI
बल्कि जीवन के सही मायने में
वो है उसका रचयिता I
जो की अभ्यस्त हो गया है प्रकृति के
काँटों की गोद में झूलने का
और अभ्यस्त हो गया है
अपनी अभिव्यक्तियों को,
दर्शाने में एक सुंदर लय ताल में
और समर्थ कर दे समाज को उसके
हठीले रुखI
पर विचार करने को
और विवश कर दे प्रत्येक को I
जीवन राह पर चलने वाले व्यक्ति
के व्यक्तित्व को समझने को I
जो उभार दे आशाओं को
जो निखार दे जिंदगी के मायने
जो संवार दे इनकी छवि, वो ही है
सही मायने में हैं कवि
