कुदरत के रंग
कुदरत के रंग
ऐ ख़ुदा तेरी इस दुनिया में अनेको रंग भरे हैं,
एक रंग में भी कितने रंग जुड़े हैं।
एक सूरज से किरण निकली,
धरा पर फैली जुदा जुदा ।
एक ही ज़मीन से निकले पौधे,
फल हर एक के जुदा जुदा ।
तीतली कहती मैं खूबसूरत,
रंग उस का भी जुदा जुदा ।
बड़े हसीन नज़ारे यहाँ के,
हर एक का आकार जुदा ।
लाल रंग का खून सब का,
फिर भी है इन्सान जुदा ।
एक सी दिखने वाली चीजें,
काम उनके जुदा जुदा ।
ऐ कुदरत को रचने वाले,
यहाँ तेरे नाम भी जुदा ।
आज कलम ने लिखे जो,
दिल में थे अरमान जुदा ।
ऐ ख़ुदा तू ही बता दे यह सब क्यों अलग करें है,
तेरी इस बनाई दुनिया मे अनेकों रंग भरे हैं,
