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Pratibha Bhatt

Abstract

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Pratibha Bhatt

Abstract

कुछ तो बोलो ना!!

कुछ तो बोलो ना!!

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देखो ना!

वो जो दरिया है,

मेरी आंखों में,

दरिया नहीं प्यार का,

असीम सागर हैं....

सुनो ना!!!

ये जो मेरा हृदय है ,

भावनाओं के जल से, 

भरी एक गागर है....

देखो ना ये अश्क ,

जो मेरी आंखों में,

भर - भर आते हैं ना!!

कमज़ोर नहीं पड़ते.....

भावनाओं की लहरों में, 

उस सागर की अनंत, 

गहराइयों को माप  

कर आते हैं,

ये जो मेरे लब ,

सूखे - सूखे से है ना!!

विरहन की अग्नि ,

मन की  तृष्णा ,

को भी पी जाते हैं,

बोलो ना!....

मैं एहसास हूं ना!

जीती- जागती तुम्हारे,

अंतर्मन का समर्पण है ना!

मेरे साथ - साथ कदम से कदम,

मिलाकर चलोगे ना!

कभी जो मुश्किलों से,

जो हारने लग जाऊं,

मेरा हाथ थाम कर,

मेरा हौसला बढ़ाओगे ना!

अपने हृदय से मुझे लगाकर,

जीवन में स्नेह प्रेम की,

बौछार करोगे ना!

चुप क्यों हो

कुछ तो बोलो ना!



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