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Geeta Upadhyay

Abstract

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Geeta Upadhyay

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कुछ कंस मामा से हैं

कुछ कंस मामा से हैं

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हम ना मीर से हैं

हम ना राधा से हैं

हम ना गोपी से हैं

हम ना गवाला से हैं


दिया था विष प्याले में जिस

हम अनजान उस प्याला से हैं

हमने मिश्री से हैं

हम न माखन से हैं


हम ना मैया यशोदा के आंगन से हैं

टूटी मटकी के टुकड़ों में जो है जमी

पुरानी पड़ी जामन से है

हम ना रुक्मण से हैं


हम ना भामा से है

हम ना मित्र तुम्हारे सुदामा से हैं

अज्ञानी क्रोधी बेचैन लोभी

शायद गुणों में

कुछ कंस मामा से हैं।


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