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Lakshman Jha

Inspirational


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Lakshman Jha

Inspirational


कुछ कहने भी तो दो

कुछ कहने भी तो दो

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कब तक रुलाओगे हमें,

कभी हँसने भी तो दो !

व्यथा हम किस से कहें,

कुछ कहने भी तो दो !!


झूठा वादा झूठी नीति,

झूठे सपने दिखलाकर !

मृगतृष्णा के मायाजाल,

रख डाला है भरमाकर !!


कब तक मौन रहेंगे यूँ,

कभी कहने भी तो दो !

कब तक रुलाओगे हमें,

कभी हँसने भी तो दो !!


नौकरियाँ भी छूट गयीं,

घर से बेघर होने लगे !

लोगों को हमने खोया,

कोहराम मचने लगे !!


कब तक मिलेंगे अपने,

कोई सुराग भी तो दो !

व्यथा हम किस से कहें,

कुछ कहने भी तो दो !!


शिकायत सुनने वाला,

किसी की नहीं सुनता !

उलट कर राष्ट्रद्रोह के,

अभियोग में ही फँसता !!


कब तक फँसाओगे हमें,

आज़ाद होने भी तो दो !

व्यथा हम किस से कहें,

कुछ कहने भी तो दो !!


जो वादा करके आए,

उसको निभाना चाहिए !

इतिहास के पन्नों में,

पहचान बनाना चाहिए !!


जनहित में कुछ करके,

नाम कमाने भी तो दो !

व्यथा हम किस से कहें,

कुछ कहने भी तो दो !!



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