कुछ अल्फ़ाज़.
कुछ अल्फ़ाज़.
कुछ अल्फ़ाज़ उधार लिए निकला हूं,
किसीको बिना बताए में घर से निकला हूं।
कुछ किस्से में क्या हुआ सुनना नहीं चाहता,
कुछ किस्से कैसे हुवे में सुनाना नहीं चाहता।
बहुत दूर से चलकर आया हु इस नगर में,
और तेज थी धूप में अब पानी पीना चाहता हूं।
जिंदगीने भी करवट बदली और इम्तेहान लिए,
उसकी कोई हद नहीं होती, ये आपको बताने आया हूं।
जाना है बहुत दूर चाहमें और वो खुद के आधार,
यही सोचने में यहां तक आया हु।
सुबह से शाम होने आई है, और केडी,
में अपनी मंज़िल की तलाश में केडी से गुजर रहा हूं।
Rabari Kamlesh Ghana
