।।कर्तव्य।।
।।कर्तव्य।।
ज़िंदगी में आए हो तो कर्तव्य करना चाहिए।
जानकर कर्तव्य को हर कार्य करना चाहिए।
कर्तव्य से ही ज़िंदगी सभी की खुशहाल है।
कर्तव्य का पथ बहुत लेकिन विशाल है।
कर्तव्य से कभी बिमुख न मन को तुम करो।
कर्तव्य कर खुशहाल जीवन अपना करो।
बहती हुई नदी कर्तव्य अपना है निभाती।
हरी भरी धरती कर प्यास सबकी बुझाती।
सीख लो कर्तव्य अपना बहती नदी से।
जोड़ लो नाता तुम अपनी ज़िंदगी से।
गहरे समुंदर से रखो विचार अपने तुम।
अच्छे कर्तव्य से पूर्ण कर लो सपने तुम।
बिना कर्तव्य के बेकार है जीवन तुम्हारा।
जिसने किया कर्तव्य उसी ने जीवन संवारा।
धरती के जीव को कर्तव्य तो करना पड़ेगा।
ज़िंदगी के पथ पर आगे तो बढ़ना पड़ेगा।
आलस्य को पास में कभी आने न देना तुम।
आलस्य में कभी कर्तव्य न भूल जाना तुम।
हर एक मनुष्य को कर्तव्य महान बनाता है।
कर्तव्य परायणता से मनुष्य ऊॅ॑चा उठ जाता है।
