STORYMIRROR

Dr.Shilpi Srivastava

Inspirational

4  

Dr.Shilpi Srivastava

Inspirational

कृष्णावतार

कृष्णावतार

1 min
10

हे केशव ! तेरी धरती पर,

मर्यादा तुझको रही पुकार,

क्यों नहीं सुनाई देती अब,

तुझे करुणा भरी वही चीत्कार,


क्या द्रुपद कुमारी ही केवल,

तेरी रक्षा की अधिकारी थी ?

क्या तेरी वह सारी लीलाएं,

बस दुःशासन पर भारी थीं ?


अब इस युग में लगता है जैसे,

दुःशासन ने है लिया अवतार,

हर पग पर वह बैठा है ऐसे, 

धरती पर हो उसका अधिकार,


मात-पिता का है यह धर्म, 

दे पुत्रों को समुचित संस्कार,

वह दुःशासन बन कर ना उभरें,

हर घर में हो कृष्णावतार

हर घर में हो कृष्णावतार।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational