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Shilpi Srivastava

Inspirational


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Shilpi Srivastava

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कृष्णावतार

कृष्णावतार

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हे केशव ! तेरी धरती पर,

मर्यादा तुझको रही पुकार,

क्यों नहीं सुनाई देती अब,

तुझे करुणा भरी वही चीत्कार,


क्या द्रुपद कुमारी ही केवल,

तेरी रक्षा की अधिकारी थी ?

क्या तेरी वह सारी लीलाएं,

बस दुःशासन पर भारी थीं ?


अब इस युग में लगता है जैसे,

दुःशासन ने है लिया अवतार,

हर पग पर वह बैठा है ऐसे, 

धरती पर हो उसका अधिकार,


मात-पिता का है यह धर्म, 

दे पुत्रों को समुचित संस्कार,

वह दुःशासन बन कर ना उभरें,

हर घर में हो कृष्णावतार

हर घर में हो कृष्णावतार।


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