कृष्ण
कृष्ण
रास रचैया आपको, कहते हैं चितचोर।
प्रेम सहित अर्पित दही, खाओ नंद किशोर॥
दरश दीजिए मोहना, मन मेरा बेचैन ।
सपना है द्वारे खड़ी, राह तक रहे नैन ।।
विनती कान्हा आपसे, सबका मंगल होय।
तेरी बरसे कब कृपा , जान सके न कोय।।
मिले प्रीत में यूँ सजन, मधुर मधुर मुस्काय ।
आ जाओ अब मोहना, मन पुलकित हो जाय ।।
सपना ने सब कह दिया, बाकी कहा न जाय।
रास रचाये कृष्ण तो, फिर कछु रास न आय ।।
सपना ने सब कह दिया, बाकी कहा न जाय।
रास रचाये कृष्ण तो, फिर कछु रास न आय ।।
बोझ हृदय 'सपना' लिए, खड़ी द्वार पर आय ।
कब आओगे मोहना, शान तुम्हारी भाय ।।
तेरी मुरली मोहना, मन को मधुर सुहाय।
घर-आँगन अब सब जगह, तेरी तान सुनाय।।
मैया के तुम लाड़ले, पाते नंद दुलार।
हलधर के प्यारे बहुत, सपना करे पुकार॥
आ जाओ कान्हा यहाँ, दिखलाओ अब राह ।
जले कर्म की बातियाँ, जगा सकूँ संसार ।।
