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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

कृष्ण जन्म

कृष्ण जन्म

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माता -पिता और सभी गए थे धन्य जब आई वो अष्टमी की रात थी, 

घन पर बादल जोरों से गरज रहे थे और हो रही झमाझम बरसात थी, 


देवकी और वासुदेव को मिली थी पीड़ा जो वेदना का प्रतीक थी, 

प्रलय के इस त्रास में पूरे विश्व को बस उनसे बंधी एक ही आस थी I


देवकी वासुदेव बस वहाँ दो प्राणी कबसे बंद पड़े थे कारावास में, 

और रक्त ही रक्त बिखरा पड़ा था वहाँ चारों ओर उस कारागार में , 


अपने भाई से बेड़ियाँ जिनको मिली थी विवाह के संग उपहार में, 

आज इस रात में अपने आप ही खुल गई वो बेड़ियाँ कारागार में , 


देवकी- वसुदेव कब से पी रहे थे अपने आंसुओं में वेदना विश्व की, 

सात पुत्रों की व्यथा कह रही थी कहानी, पाप और अत्याचार की,


टूट गई बेड़ियाँ सभी समाप्त होने वाला था कंस का अत्याचार अब, 

सपने सारे पूरे हो चले थे सभी के हो रहा था जगत का उद्धार अब, 


अष्टमी के तिमिर में काल की कोठरी में आज स्वयं गोपाल पधारे थे, 

कारागार में देवकी की कोख से जन्मे भगवान कृष्ण बाल हमारे थे, 


आठवाँ पुत्र करेगा उद्धार देव के वरदान का देवकी को आभास था, 

यमुना उफान पर ले रही थी सिसकियाँ, यह पल बहुत ही खास था, 


खुल गया कारावास और सो गए थे सभी पहरेदार गहरी नींद में,

कृष्ण संग यमुना की बढ़ती तरंगें वासुदेव को ली गई मझधार में, 


जिनको हर- बार मिली व्यथा और मिला रक्त अपने ही संतान का, 

आज मना रहे थे वे खुशियाँ इंतजार था सबको कृष्ण भगवान का।


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