" कर्मयोगी "
" कर्मयोगी "
किसने कहा
ख्वाब पूरे
नहीं होते,
पहले तो
अच्छे सुनहरे
ख्वाब देखो !
जिसे चाहत
होती है
आसमां छूना,
क्षितिज में
पंख फैला
करके देखो !!
कर्म से ही
लोग बनते
हैं धनुर्धर,
भाग्य की धारा
को वो मोड़ देते !
अपने बल
पराक्रम के
भंगिमाओं से
महाभारत युद्ध
सारे जीत लेते !!
"कर्मयोगी "
कर्म पर विश्वास
करते,
क्षणिक धन से
उन्हें क्या करना ?
सम्मान के
भूखों के वे
प्यासे हैं,
उन्हें मुफ़्त की
भीख क्यों लेना ?
