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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational

"स्वतंत्रता की साँस"

"स्वतंत्रता की साँस"

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जयहिंद "StoryMirror"
विषय : इतिहास -बोधक गीत 
उपलक्ष्य : भारत का स्वतंत्रता  दिवस 
शीर्षक :"स्वतंत्रता की साँस"

निष्कर्ष: यह एक सफल इतिहास-बोधक गीत है। यह पाठ्यपुस्तक के तथ्य नहीं, बल्कि एक बुजुर्ग राष्ट्र-भक्त की आँखों से देखा गया स्वतंत्रता का जीवंत चित्रण है। इसकी सादगी ही इसकी शक्ति है।
दिनाँक: 14 अगस्त 2026 
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"स्वतंत्रता की साँस"
डॉ॰ लक्ष्मण झा 'परिमल'
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स्वतंत्रता अपने भारत की, सुनाऊँ आज मैं तुमको,
नहीं, यह बात थोड़ी है सुनाऊँ दो सदी तुमको !
प्लासी युद्ध से उनका, बढ़ा व्यापार भारत में,
सदी ज्यों ही पूरी हुई, लिया सम्पूर्ण हाथों में।
विदेशी बन गए शासक, गुलामी सिर पर आई,
लड़ी पहली लड़ाई हमने, सफलता उनके सिर आई।
पचासी में बना कांग्रेस, स्वतंत्रता हमें लेनी थी,
लड़ेंगे हम अंग्रेजों से, कुर्बानी हमें देनी थी।
जब आए गाँधी भारत में, हुआ चहुँओर आंदोलन,
कभी असहयोग होता था, कभी दांडी का उद्घोषण।
भगत सिंह की कुर्बानी से, लगा अंग्रेजों को झटका,
समर में आ गए आज़ाद, दिया सुभाष ने झटका।
क्या जज़्बा था हम सब में, नहीं कोई शस्त्र काम आया,
लड़े हम एकता लेकर, तभी परिणाम मिल पाया।
हुए आज़ाद हम जिस दिन, नमन हम उनको करते हैं,
जिनके बदौलत आज हम, स्वतंत्र से  साँस लेते हैं।
यही है एकता अपनी, सभी का मान करता हूँ,
रहे भारत सदा विजयी, सभी को जय-हिन्द कहता हूँ!
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- डॉ. लक्ष्मण झा 'परिमल', 
दुमका, झारखंड 


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