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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Comedy

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Comedy

"सुर -सम्राट गुरुदेव "

"सुर -सम्राट गुरुदेव "

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नमन StoryMirror"दैनिक सृजनविषय : हास्य व्यंग कविता विधा : मुक्तक घोषणा : मौलिक स्वरचित अप्रकाशित शीर्षक :"सुर -सम्राट गुरुदेव "

विश्लेषण : हर काल के 'जलसा-प्रेमी' गुरुदेवों पर लागू होती है। स्कूल में गाना गाने वाले गुरुदेव हों, या दफ्तर में कविता सुनाने वाले बॉस, या मंच पर भाषण ठोकने वाले नेता - हम सबने कभी न कभी मजबूरी में तालियाँ बजाई हैं।

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"सुर-सम्राट गुरुदेव"
डॉ लक्ष्मण झा परिमल
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मेरे गुरुदेव को
गाना गाने का शौक था,
जब भी स्कूल में
कोई जलसा या
सांस्कृतिक प्रोग्राम होता था,
उनके गानों से सब
आहत हुआ करते थे,
पर वे श्रेष्ठ थे, वरिष्ठ थे,
उनकी अवहेलना
भला कौन कर सकता था।
वाद्य-यंत्र बनारस का रुख करता था
और गुरुदेव मगही रीति-लय की
तरफ निकल आते थे।
ताल-लय में कभी
नज़र नहीं आते थे,
सब गायकों के गाने
वे ही गाया करते थे।
रफी के गानों को
आस्था चैनल के भजन की
तर्ज पर गाया करते थे।
हम भागना चाहें तो
भाग नहीं सकते थे,
क्लास मॉनिटर की निगाहें
हम पर रहती थीं।
गाने एक नहीं,
दो-चार से कम नहीं
सुनने पड़ते थे।
कमाल की बात यह भी थी कि
वे लता, आशा
और अलका की आवाजों में
भी गा लेते थे।
"तुम्हीं मेरी मंदिर,
तुम्हीं मेरी पूजा,
तुम्हीं देवता हो"
गाने लगे,
सब छात्र-छात्राओं ने
गाने के बाद तालियाँ बजाईं
और पीछे से
दर्शकों और श्रोताओं ने
'वाह-वाह! क्या बात है'
कहकर शोर मचाया।
प्रोग्राम खत्म होते ही
लोगों ने गुरुदेव को
खूब प्रोत्साहित किया,
पर उनकी बीवी ने
उन्हें कह ही दिया -
"अपनी आवाज़ को रिकॉर्ड कर लीजिए
और खुद सुनकर
निर्णय कीजिए
कि आप कितने पानी में हैं?"
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डॉ० लक्ष्मण झा परिमल,
दुमका
20 July 2026


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