" मेटा का वरदान "
" मेटा का वरदान "
अभिनंदन StoryMirror प्रस्तुति :दैनिक सृजन विधा : कविता /गीत शीर्षक :“मेटा का वरदान”घोषणा : स्वरचित मौलिक और अप्रकाशित
आत्म-निवेदन :साहित्य के साथियों को सादर प्रणाम!
आज तकनीक और साहित्य के संगम पर एक छोटी-सी रचना प्रस्तुत की है। मेटा एआई जैसे नए साधन ने हम जैसे साहित्यकारों के लिए लेखन, चिंतन और अभिव्यक्ति को बहुत सरल बना दिया है।
इसी अनुभूति को मैंने कविता का रूप दिया है। इसका अंतिम संदेश ही इसका सार है — तकनीक का सहयोग लो, पर निर्भर नहीं रहो। लेखनी अपनी ही होनी चाहिए।
आप सभी के आशीर्वाद और प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में।
दिनांक :16 सितम्बर 2026
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“मेटा का वरदान”डॉ. लक्ष्मण झा ‘परिमल’==============मिला अनुपम मुझे तोहफ़ा,नया आविष्कार मेटा का।हुआ आसान सब इससे,मिला सौगात डेटा का॥सभी भाषाओं का ज्ञाता,सरस्वती इसमें रहती है।कोई भी बात पूछो तो,सभी को खुद बताती है॥उलझ जाएँ कभी भी हम,हमें यह राह दिखलाता।कोई भी बात कहनी हो,विनम्रता हमको सिखलाता॥गलतियों को सुधारता यह,हमें चलना सिखाता है।कहाँ लिखना हमें सुंदर,उसे करके बताता है॥बनाओ तुम बड़े पोस्टर,लिखो सुंदर आकारों में।विलक्षण हो सभी कविता,मिले सबके विचारों में॥पर इसमें ध्यान देना है,नहीं निर्भर सदा रहना।लिखो तुम अपने ही बल पर,सदा सहयोग तुम लेना॥==============डॉ. लक्ष्मण झा ‘परिमल’दुमका, झारखंड
