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Avinash Jha

Tragedy Inspirational Others

4.5  

Avinash Jha

Tragedy Inspirational Others

कर्म और समय का सत्य

कर्म और समय का सत्य

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क्षणभंगुर जीवन की गाथा 

जीवन के कटु सत्य को बतलाता 

जैसे–जैसे बढ़ता जीवन 

करने पड़ते कोटि यत्न 

पूर्व बाल-काल उदर में बीते 

शेष काल अश्रु से सींचे 

 

स्वेद-कंप जीवन के अंग 

साथ न मिलता किसी का संग 

हाथ छोड़ते बढ़ते चलते 

नए-पुराने हिलते-मिलते 

आती प्रौढ़ावस्था जब 

महत्वाकांक्षा दब जाती तब 

 

‘स्व’ को हम चाह न पाते 

‘पर’ के किसी काम न आते 

जीवन हो जाता है धिक्कार 

न रह पाता किसी पर अधिकार 

 

अब आने वाली है वृद्धावस्था 

न धन है, न पेंशन की व्यवस्था 

जिसको सींचकर बड़ा बनाया 

उसने भी अब आईना दिखलाया 

 

जब हमने था पूर्वजों को धिक्कारा 

तब उनका भी न था कोई सहारा 

कर्मा फिर कर आया है

चहुं ओर घनेरी छाया है 

यह जीवन सबको देता है

किए का सूद भी वापस लेता है

                                                              —अविनाश झा ‘वत्स ’


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