STORYMIRROR

Umesh Shukla

Tragedy

4  

Umesh Shukla

Tragedy

न्याय के लिए

न्याय के लिए

1 min
273

न्याय के लिए ही जारी

है पूरी दुनिया में संघर्ष

बलशाली अपनी जीत

पर सतत मना रहे हर्ष

जश्न मनाने वालों को 

को निज बल पे गुमान

न्याय हाशिए पर पड़ा

पाने को सही सम्मान

दुनियाभर में शांति को

बने जितने भी संस्थान

उन पर भी काबिज हुए

धन, बाहुबल के कद्रदान

ऐसे में फिर वंचितों को 

मिले कहां से सही न्याय

शोषण के पाटों में पिसना

ही उनकी नियति कहलाए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy