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Dr Baman Chandra Dixit

Abstract

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Dr Baman Chandra Dixit

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कोशिश की

कोशिश की

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आज फ़िर मैने कोशिश की

मुस्कुराने की एक कोशिश की

अक़्सर हार जाता हर दफ़ा फिर भी

फिर से हारने की कोशिश की।।


होंठ मान गयी हिली हलकी सी

दिल जान गयी खिली पुलकि सी

आंखों की नमी पलकों के तले

छिपा रखने की कोशिश की।।


कराहों का राह रोकना चाहा

आहों का प्रबाह टोकना चाहा

रोका-टोकी में अटकी दर्द को

दिलमें दफनाने की कोशिश की।।


शुखे शाख़ से टूटे पत्तों को

बिखरे बिसरे रूखे रिश्तों को

किश्त दर किश्त समेटने के बाद

फिर से संवारने की कोशिश की।।


सूरज दुब चुका चांद उगा नहीं

मालूम है वो आएगा भी नहीं

अंधेरों को निहार कर सलिखे से

राह तलाशने की कोशिश की।।


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