STORYMIRROR

डॉ दिलीप बच्चानी

Drama

4  

डॉ दिलीप बच्चानी

Drama

कोरोना

कोरोना

1 min
638

इंसान इंसान से डर रहा है

चहुओर सन्नाटा पसर रहा है। 


मौत तो जाने कब आएगी

हर पल डर डर के मर रहा है। 


अंजान साये ने घेर लिया है

उजाला अंधकार से डर रहा है। 


विश्व शक्तियां परास्त हो चुकी

भारतवर्ष भी समर कर रहा है। 


हे जगतजननी तू ही रक्षा कर

तेरा दास ये अरज कर रहा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama