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Dr Arun Pratap Singh Bhadauria

Inspirational

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Dr Arun Pratap Singh Bhadauria

Inspirational

कोरोना से कवि की बातचीत

कोरोना से कवि की बातचीत

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एक सुनसान जगह,

कोरोना से भेंट हो गई .

मेरी तो सिट्टी पिट्टी ही गुम हो गई.

वह मुस्कुराया बोला,

कवि जी डर गए .

बड़े शेर बनते हो .

नेताओं पर बड़ी-बड़ी कविता लिखकर,

उन्हें डराते हो .

लोगों को मुझसे न डरने का पाठ पढ़ाते हो .

बिना मास्क लगाए ,

घर से बाहर ना आते हो .

जहां जाते हो ,

सेनेटाइजर साथ ले जाते हो.

अजवाइन लौंग कपूर की पोटली बनाकर,

हमेशा सूघते रहते हो .

हल्दी वाला दूध खूब पीते हो.

मुझसे तुम बहुत डरे डरे रहते हो .

उसके इस आरोप से,

मैं झुंझला गया.

गुस्से से भरकर बोला,

तू भी तो डरपोक है .

गर तुझ में हिम्मत है,

तो जा कर दिखा .

नेताओं की रैली में ,

बाबाओं की टोली में,

कुंभ के स्नान में,

नामांकन के जुलूस में ,

पंचायत चुनाव की वोटिंग में ,

प्रशासन से अनुमति प्राप्त शादिओं में,

यह सुनकर वह सहम गया.

बोला यार क्या बात करते हो.

तुम कवि हो ईमानदार हो ,

इसलिए किसी से नहीं डरते हो .

मैं तुम्हें राज की बात बताता हूं,

मै जब तुम्हारे यहाँ आया.

मेरे आका ने मुझे समझाया.

नेताओं और बाबाओं से सदा डरना.

धर्म और राजनीति के ,

चक्कर में ना पड़ना.

वोटिंग में ,

अपनी दखलअंदाजी मत करना.

प्रशासन के आदेश में ,

अपनी टांग न अड़ाना.

जनता पर ,

चाहे जितना कहर ढ़ाना .

तभी तुम्हें,

जीने का मिलेगा ठिकाना.

मैं उन्हीं नियमों का,

पालन कर रहा हूं.

इसलिए दिन दूनी रात चौगुनी,

तरक्की कर रहा हूं .

पुलिस से बचने के लिए ,

नाक से नीचे लटकाए,

मास्क वाले भी ,

मेरा सहयोग कर रहे हैं .

हमारे बहुत से रिश्तेदार ,

आसानी से,

उन में प्रवेश कर रहे हैं .

जनता की निडरता ,

मेरी हिम्मत बढा रही है.

बहुत सी आवादी ऐसी भी है ,

जो अभी भी मास्क नहीं लगा रही हैं .

कवि जी आप ,

चेहरे को मास्क से ढके हैं .

इसीलिये मेरे सामने निडर खड़े हैं.

मेरा आटोग्राफ लेने के लिए ,

जैसे ही उसने अपनी डायरी बढ़ाई.

मेरी आंख खुल गई ,

कोरोना से हुई बातचीत शब्दों में ढल गई.



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