कोरोना काल में जीवन
कोरोना काल में जीवन
ये समय है ,
तुम खुद में झाँको,
कमी जो तुम मे है,
उसे समझ,
उसे दूर हटाओ।
कुछ खास हो तुम,
जग में व्यर्थ नहीं कोई आया,
अपने हुनर को नई ऊँचाई,
पर चढ़ाने का वक्त है आया।
खुद में डुबो,
अंतर्मन की पहचान करो,
कब मिला था ऐसा मौका,
जब तुम अकेले रह पाये थे।
जग में सब अकेला है,आया
अकेले से क्यों हो घबराये से।
खुद को जानो - पहचानो,
श्रेष्ठ नहीं सर्वश्रेष्ठ बन जाओ,
अगर तुम चाहो,
सेवा धर्म को अपनाओ,
सेवा से बढ़कर ना कुछ होता है ,
जो सेवा में सर्वस्व अपना लगाते हैं,
सदा जग में पूज्य वो हो जाते है।
आओ कुछ इस समय में,
तुम नया कर जाओ,
जो तुम कर सकते,
कोई नहीं कर सकता है,
बढ़ा हाथों को अपने,
किसी का उपकार कर सकते हो।
अनेक कार्य हैं ,
जिसे तुम कर सकते हो,
ना कुछ कर सको तो,
घर में बैठे तो रह सकते हो,
ये तेरे और तेरे परिवार ही नहीं ,
समाज देश के हित होगा,
रुकेगी महामारी मानव
कैद से छुटेगा।
ये भी रखो ध्यान ना फैले
तुमसे कोई अज्ञान,
इधर उधर की बातों से
खुद दूरी बढ़ाओ,
स्व केंद्रित हो कुछ दिन तुम
सुंदर जीवन बिताओ।
