STORYMIRROR

Shahana Parveen

Abstract

4  

Shahana Parveen

Abstract

कोई सुबह

कोई सुबह

1 min
313

फिर से कोई सुबह,

ऐसी ला मेरे मौला !

चारों ओर उजाले की 

बारिश हो जाए।


ईश्वर दिखा करिश्मा ऐसा,

तेरे बंदो को खुशी मिल जाए।

कोई कष्ट ना हो जीवन में 

उनके जीवन से उदासी मिट जाए।


वाहेगुरु जी की कृपा से

हर घर की सुबह निराली हो।

कोई भूखा ना रहे

हर घर में रोटी- पानी हो।


फिर से कोई सुबह 

ऐसी ला मेरे जीसस

मन से कड़वाहट 

मिट जाए

कर कृपा अपने बंदों पर

हर शाम सुहानी हो जाए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract