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Ritu Garg

Inspirational


4.5  

Ritu Garg

Inspirational


कोई नहीं जीवन का रक्षक

कोई नहीं जीवन का रक्षक

1 min 260 1 min 260


कोई नहीं जीवन का रक्षक

खुद ही बनना पड़ता है 

अपने ही अपने पैरों पर चलना पड़ता है।


मुश्किल है दुनिया में चलना ,

दंशो को झेलना पड़ता है,

खुद ही अपने पैरों पर चलना पड़ता है।


सहभागी मुश्किल से मिलते,

नित्य कर्म कलाओं में,

खुद ही अपने पैरों पर चलना पड़ता है।


बहुत मुश्किल है,

जीवन की पगडंडी,

बहुत संभल कर चलना पड़ता है,

खुद ही अपने पैरों पर चलना पड़ता है।


सुख दुःख और पीड़ाओं को,

सहेजना समेटना पड़ता है,

खुद ही अपने पैरों पर चलना पड़ता है।


निर्विघ्न रुप से बढ़ने के लिए,

आत्ममंथन करना पड़ता है,

खुद ही अपने पैरों पर चलना पड़ता है।


कांटों पर चलकर,

 हमें गुलाब बनना पड़ता है,

 जिंदगी आसान नहीं .....

इसे समझना पड़ता है।

खुद ही अपने पैरों पर चलना पड़ता है।


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