STORYMIRROR

Shital Yadav

Abstract

2  

Shital Yadav

Abstract

कंजूस दोस्त

कंजूस दोस्त

1 min
35

मती गई थी मारी जिस घड़ी में ये दोस्त बनाया 

कम ख़र्च के चक्कर में करता जेब का सफाया


हद कर दी महाशय ने जब जन्मदिन था मनाया 

खाया मुफ़्त में पेटूराम बन बिल मुझसे भरवाया 


खाली करता जेबें मेरी बचतपाठ सबको पढ़ाता 

दोस्ताने की चाहत में इस आफ़त को हूँ निभाता 


फूटी मेरी क़िस्मत में नमूना ये आया मक्खीचूस 

रामभरोसे ख़ूब फलता-फूलता मेरा दोस्त कंजूस!

  


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract