ADITYA MISHRA
Abstract
कलयुग में नहीं कोई
किसी का मान है रखता,
लोगों के चरीत्र पर
लोग ही संवाद है करता।
उठना है अगर तुम्हें
तो अपनी नज़र में उठो,
औरों ने तो सीता पर भी
उंगली उठाये थे।
नारी तुझे प्र...
शायर की रूबाई
जीवन की धारा
माँ-" माई वंड...
सूना फाल्गुन
मैंने उसे जान...
रूप पर मोहित ...
ग्रैंडपा
फितरत जिंदगी ...
भारत मां
कोई समझाओ इसे की ये पूरी कायनात ही झूठी है। कोई समझाओ इसे की ये पूरी कायनात ही झूठी है।
लेक़िन शान से हर सपना पूरा कर सके, ऐसा हर लम्हा हो तेरा l लेक़िन शान से हर सपना पूरा कर सके, ऐसा हर लम्हा हो तेरा l
नारी तुम बँधी हो केवल अपने सपनों के संसार से। नारी तुम बँधी हो केवल अपने सपनों के संसार से।
मेरी बिंदिया से ये गुफ़्तगू कर रही है कि शायद उदास हूँ मैं। मेरी बिंदिया से ये गुफ़्तगू कर रही है कि शायद उदास हूँ मैं।
समंदर में नाव-सा, धूप में छांव-सा, शहरों में गांव-सा दर्पण के भाव-सा है मेरा दोस्त। समंदर में नाव-सा, धूप में छांव-सा, शहरों में गांव-सा दर्पण के भाव-सा है...
घर - घर में मर्यादा और संस्कारों, की होली जल रही है ! घर - घर में मर्यादा और संस्कारों, की होली जल रही है !
फिर क्यों मैं इन रातों की तन्हाइयों से डरता हूँ ! फिर क्यों मैं इन रातों की तन्हाइयों से डरता हूँ !
छोड़ो बैर अब रहने भी दो, जो भी बची लड़ाई है। छोड़ो बैर अब रहने भी दो, जो भी बची लड़ाई है।
स्वयं प्रकाशित होने को, दीप –पर्व की शुभकामनायें। स्वयं प्रकाशित होने को, दीप –पर्व की शुभकामनायें।
कभी बच्चे की खिलखिलाहट देखता हूँ कभी मां की ममता देखता हूँ तो काग़ज़ और कलम ले उनके कभी बच्चे की खिलखिलाहट देखता हूँ कभी मां की ममता देखता हूँ तो काग़ज़ और ...
जिनके खेतों में है धूप घमासान फिर भी होठों पर है सुखी मुस्कान। जिनके खेतों में है धूप घमासान फिर भी होठों पर है सुखी मुस्कान।
ना जाऊंगी मैं ससुराल ओ माँ तुम मेरी बाते सुनलो ना करोगी ब्याह मेरा जाकर उनसे ये कह दो ना जाऊंगी मैं ससुराल ओ माँ तुम मेरी बाते सुनलो ना करोगी ब्याह मेरा जाकर उनसे...
मनता जब नवरात्रि-पर्व हर साल देश में दिव्य प्रभा से मिट जाता सारा तम दूषित। मनता जब नवरात्रि-पर्व हर साल देश में दिव्य प्रभा से मिट जाता सारा तम दूषित।
फिर मैंने कभी उसे मना नहीं किया अपना कांधा देने और रोने के लिए। फिर मैंने कभी उसे मना नहीं किया अपना कांधा देने और रोने के लिए।
झंझावती हवा भी न तोड़ पाएगी मुझे हर तूफ़ान का उफान कम कर दूँ। झंझावती हवा भी न तोड़ पाएगी मुझे हर तूफ़ान का उफान कम कर दूँ।
पहले फूंको कलुष भाव को, निज दोषों का दाह करें पहले फूंको कलुष भाव को, निज दोषों का दाह करें
जिसमें डूबता है कभी मन और कभी उबरता। जिसमें डूबता है कभी मन और कभी उबरता।
आँखों का गंगाजल जग की निष्ठुरता धोता है। आँखों का गंगाजल जग की निष्ठुरता धोता है।
पास आकर मेरे इन अंधेरों में, क्यों इसे रौशन करता नहीं है ! पास आकर मेरे इन अंधेरों में, क्यों इसे रौशन करता नहीं है !
मैंने सब नामों को घेर लिख डाला भारत। मैंने सब नामों को घेर लिख डाला भारत।