कलयुग का सावन
कलयुग का सावन
सावन का रहता है
इंतजार क्योंकि
सावन मन भावन
बदरा बरखा पिया
मिलन विश्वास जगावत
आश सावन!!
चाहुओर हरियाली
पक्षी प्राणी प्रकृति
चित्त चित्तवन सावन
भावन!!
रिम झिम बरसे बदरवा
काला घनघोर जिया मे
शोर सजग साज सावन!!
गोरी का इंतज़ार
प्रेम प्यार यार का
वरखा बदरा सावन!!
बिजली कड़क चमक
जीवन संघर्ष सुनावत
सवान!!
प्रेम प्यार फुहार
बौछाऱ युवा उमंग
करे तार तार कहत
आवत बार बार
सावन !!
सावन कि वरसात
जीवन उपहार
गोरी के प्यार बरखा
बाहर का संसार सावन!!
पिया मिलन का पहला
सावन कदम्ब कि डाल
पिया घर झूला सावन
जीवन जन्म एहीवात
प्रेम पिया परिवार सावन!!
घने केशुओ मे छिपे
चाँद कि चांदनी दीदार
के इंतज़ार का सावन!!
सावन हरियाली खुशहाली
ज्ञान ध्यान बैराग्य कान्हा
शंकर राम संस्कृति संस्कार
सावन
बाढ़ मे बिछड़े परिवार
छूटे घर बार चारो ओर
त्राहि त्राहि मचावत सावन
खेत बारी खरिहान डूबे
फ़सल मेहनत दाम बिटिया
बेटवा क वियाह गवन पढ़ाई
क जग हसाई दुबल बाढ़े
पसीना कमाई
रहल सावन के इंतज़ार
ख़ुशी खास टूटल कहर
सपना सम्पति घर द्वार
सब बर्बाद!!
फिर सावन के इंतजार खुशहाली
हरियाली सुगंध डाली डाली गांव
घर मधुवन बहर!!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!
