कल्पना
कल्पना
भीतर मेरे उथल पुथल, उत्तकों की बदलती तीव्रता
शिराओं में बहता आक्रोश, गर्म रक्त की व्याकुलता
मानसपटल में कभी टहलते, कभी भागते कभी दौड़ते
कभी छीना झपटी करते, कभी समझौते उमड़ पड़ते
मन का अतीत एवं भविष्य, अनुभव संघर्ष की कल्पना
सुख दुख की खिलती खुशबू, तस्वीरों का बहता झरना
असीमित अपने हाथ फैलाये, यूँ चल पड़ा दौर उसका
हर पल लक्ष्य को भेदते, चारों तरफ है शोर जिसका
जिज्ञासू है जीवन का सारांश, हर्षित है कहानी मेरी
जिसे खत्म न होना, बनी रहे आखिरी सांस तक मेरी।
