STORYMIRROR

Poetry Lover

Others

2  

Poetry Lover

Others

तस्वीर

तस्वीर

1 min
141

दीवार पर लदी एक मुरझायी कील में

किसी अनजान की तस्वीर

आये उन मेहमानों का ध्यान

खींच रहा अपनी ओर।


साधारण अवस्था में चिपकी

गूंगी मुखरित होकर

अधूरेपन को दर्शाती

रंग भरा एक से दूसरी छोर।


दिखती उसमे लम्बी केश जटाएं

गहरी काली आँखें

एक आदर्श अर्थ छिपाये

नज़रें उसकी झकझोरे।


सीढ़ियां चढ़ते उतरते पड़ती नज़रें उसमे

खयाल भी कमाल के उसी के

ढलती शाम और चढ़ता सूरज

याद आती वो परी सुन्दर एवं प्योर ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन