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कलम

कलम

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कलम कहीं कब रुक पाती है ,नभ में परे उड़ान ।

 कह जाती है प्रीत दिलों की ,नयन लिए अरमान ।


आड़े-तिरछे शब्द उकेरे , भर-भर उर में भाव ।

अनबुझ,गहरे इन शब्दों से,मेरा रहा लगाव ।

सतरंगी सब रंग बिखेरे ,जब मन हो वीरान ।


कह जाती है प्रीत दिलों की ,नयन लिए अरमान ।


जाने किसका बिम्ब उभारे ,अक्षर अक्षर जाल ।

कहीं लहर का नृत्य अनोखा ,कहीं पवन दे ताल ।

श्वास सुवासित करती सौंधी मिट्टी की मुस्कान ।


कह जाती है प्रीत दिलों की ,नयन लिए अरमान ।


पीड़ा मीरा की लिखती अरु,राधा जी का प्यार ।

वीर जवानों की करती है ,कलम मेरी जयकार ।

छन्द,गजल,गीतों को मेरे ,देती है पहचान ।

कह जाती है प्रीत दिलों की ,नयन लिए अरमान ।




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