कलम का साथ
कलम का साथ
कलम से विचारों को अक्षरों में अभिव्यक्त कर दिया
कलम उठाई और हमने जमाने पर अपना विचार लिख दिया
ये कलम ही सदियों का साथी ,गुरु मित्र रहा है हमारा
हमने भी साथ निभाया कलम से एक नया भाव लिख दिया
अपने जीवन के हर लम्हों का साक्षी तुम्हें बनाया
अपने अश्रु की स्याही में डुबोकर हमने तो हर गम कह दिया
जमाने में सच्चाई की पहचान तुमसे ही हमने सीखा
संसार के हर रहस्यों पर हमने तो उसका इतिहास लिख दिया
तुम संग कविता की चादर में नए –नए रंग भरकर
हर रंगों में जीवन के रंगों को तुमने निखरना सीखा दिया
राधा कृष्ण का प्रेम तो कहीं गोपियों का संग
भावनाओं को लफ़्ज़ों में पिरो कर कृष्ण प्रेम को सजा दिया
तुम संग सपनों के सौंदर्य को जीवन में सजाकर
दूर आकाश में पक्षियों सा आशाओं के पंखों को फैला दिया
मझधार में टकराकर तूफानों को पार किया हमने
निडरता का अहसास दिलाकर तूफानों में भी उड़ना सीखा दिया
तुम संग यात्रा का सफ़र ना खत्म होने वाला
साथ देकर जीवन के पहलू में हमने अपना यात्रा वृतांत लिख दिया
तुम संग रच दी जीवन की हमने नई कहानी
विचारों की इस कलम से कहानी का पूरा हमने सारांश कह दिया।
