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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational Others

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational Others

कलम आज ललकार रही

कलम आज ललकार रही

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उठ जाओ वीर धनुर्धर अब,

कलम आज ललकार रही !

क्यूँ मूक बधिर से लगते हो ,

कविता तुम्हें पुकार रही !!


कौन सुनेगा क्रंदन उनका ,

जो अपने घर में क़ैद हुए !

अधिकारों को रौंद रौंद कर ,

उनके सुख को छीन लिए !!


व्यथित ह्रदय को कौन सुनेगा ,

आँखें उनकी निहार रही !!

उठ जाओ वीर धनुर्धर अब,

कलम आज ललकार रही !

क्यूँ मूक बधिर से लगते हो ,

कविता तुम्हें पुकार रही !!


लिख डालो उनकी पीड़ा को ,

लाखों बच्चे उनके कहाँ गए ?

जब देश हमारा अपना है ,

तब युवक हमारे कहाँ गए ??


मायें बहने बंद कमरों में ,

घुटकर अपने आँसू पोछ रही !

उठ जाओ वीर धनुर्धर अब ,

कलम आज ललकार रही !!

क्यूँ मूक बधिर से लगते हो

कविता तुम्हें पुकार रही !!


कब तक इनके अधिकारों ,

को जंजीरों में जकडेंगे ?

कब तक इनके जज्बातों ,

को पदतल से हम कुचलेंगे ?


यह ज्यालामुखी बन सकती है

जनता सब चीत्कार रही !

उठ जाओ वीर धनुर्धर अब ,

कलम आज ललकार रही !

क्यूँ मूक बधिर से लगते हो

कविता तुम्हें पुकार रही !!




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