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Dheerja Sharma

Abstract

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Dheerja Sharma

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किवाड़

किवाड़

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ज़िन्दगी के किवाड़

खुलें नही रहते

हमेशा बंद भी तो

नहीं होते।


आगे बढ़

हाथ बढ़ा

ज़रा धकेल

क्या पता

दूसरी तरफ

सांकल न लगी हो।


विश्वास के साथ

आगे बढ़

हाथ बढ़ा

क्या पता

किवाड़ बस

भिड़े ही हो !


कदम बढ़ा

आगे बढ़

क्या पता

एक पूरी दुनिया

तेरी तरफ खुल जाए।


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