किट्टू की कहानी
किट्टू की कहानी
सुनो सभी, मैं सुनाऊँ कहानी,
ख्वाब छोटी किट्टू की।
बड़ी शरारती पर बुद्धिमान,
सवालों से भरी है जैसा कोई किताब की।
अतरंगी सवालें करती हैं,
सबको सोचने पर करती है मजबूर।
जिन समस्याओं का ना मिले जवाब,
ढूंढती उससे वो देख कर सुंदर ख्वाब।
मन में आया सवाल उसके,
क्या कोई रहता है दूसरे ग्रह पे?
रात में आंखें बंद कर के,
उड़ गई वो अंतरिक्ष यान में बैठे के।
उड़ रही थी वो सुपर हीरो की तरह,
रास्ते में देखा उससे एक और अंतरिक्ष यान।
ठहर कर उसे देखा,
बैठा है कोई अजीब प्रजाति वहाँ।
देख कर उससे वो पहले घबरायी,
हिम्मत जुटा के वो अब पहुंची।
पुछा उसे, "तुम कौन हो और क्या यही रहते हो भाई?"
वो अजीब प्राणी जब बोला हां,
आंखें और मुंह किट्टू का खुला रह गया।
सुनकर अपनी भाषा को,
किट्टू हुई हैरान।
खोला बक्सा सवालों का,
पूछे एक एक करके हजारों सवाल।
खाना, पीना, घूमना, रहना,
क्या तुम भी पढ़ाई करते हो यहां?
पहले तो वो भी डर गया,
सुन के किट्टू के ढेरों सवाल।
फ़िर मुस्कुरा कर कहा,
चलो सेर कराऊँ तुम्हें यहां आज।
ग्रह हमारा है छोटा सा,
न खाना, न पीना है यहां।
धूप से मिलती है ऊर्जा,
करते हैं सब मिल के हर काम।
देख रही हो ऊपर नीचे,
टेढ़े थोड़े नुकीले रास्ते।
चल नहीं पाओगी ठीक से, क्योंकि
ऑक्सीजन की है कमी यहां पे।
और बताओ क्या जानना है तुम्हें,
क्या रहना चाहती हो तुम यहां पे?
देखकर दूसरे ग्रह को,
खुश हो रही है किट्टू।
अच्छा है मैं धरती पर हूं,
आम सी जिंदगी बेहतर में जी रही हूं।
दोस्त बना कर उस प्रजाति को,
कहा किट्टू ने अलविदा।
तुम भी आना धरती पे,
सैर करूंगी मैं तुम्हें वहाँ।
अंतरिक्ष यान में बैठ कर वो वापस आई,
स्वप्न टूटा तभी और
सुनायी दीया उससे अपनी मम्मी की डांट!
उठो जल्दी, जग जाओ
जाना नहीं तुम्हें क्या स्कूल आज?
