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Heena Ayalani Lachhani

Others

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Heena Ayalani Lachhani

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जीवन की दौड़

जीवन की दौड़

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दौड़ लगी थी कुछ बन कर कर दिखाने की,

मैंने भी दौड़ लगायी।

पढ़ाई करके ही कुछ बन पाओगे,

यही बात सबने मुझे समझाई। 


शहर छोड़ा, घर तक छोड़ा,

पढ़ाई पूरी करने में।

हाथ फिर भी लगा तो क्या,

एक छोटी नौकरी जीवन में।


नए दोस्त बनाए जीवन में,

पुराने मुझसे बिछड़ गए।

नौकरी करने में ना जाने

कितने साल गँवा दिए।


दिन से रात, तो कभी

रात में अतिरिक्त काम।

अतिरिक्त आय का लालच देख,

भूल गया करना आराम।


हर बार दिल में एक बात खटकती है,

काश छोटा अपना काम कर लिया होता जीवन में।

परिवार, दोस्तों से ना बिछड़ता,

और जीवन भी व्यतीत करता हँसी खुशी में।


अब भी दौड़ जारी है,

बस फर्क एक छोटा सा है।

तब पढ़ना जरूरी था जीवन में,

अब हुनर दिखाना जरूरी है।



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