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Heena Ayalani Lachhani

Abstract Tragedy Inspirational

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Heena Ayalani Lachhani

Abstract Tragedy Inspirational

स्वस्थ रहे! घर पर रहे!

स्वस्थ रहे! घर पर रहे!

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सुख और दुःख जीवन में आता है,

तकलीफों से निपटना यही सिखाता है!

हर इंसान खुश तो नहीं रहता,

कभी मुश्किलों से भी लड़ना पड़ता है !


हाल कुछ ऐसा ही है,

मेरे भारत, मेरे लोग बीमार है!

न जाने कब यह बीमारी जायेगी,

कब मेरे लोगों की हालत ठीक होगी,

यकीं सिर्फ इतना है,

की आखिर में दुआ ही काम आएगी!


कई लोगों की लापरवाही ने,

खुद को और दूसरों को बीमार किया है!

अपनी तकलीफों से भाग रहा,

दूसरों को भी उसी बीमारी में धकेल रहा है!

लेकिन मौत तो कभी कह कर नहीं आती,

वो लापरवाह को ही नहीं,

स्वस्थ इंसान को भी ले जाती!


अब तो थोड़ा सीखे,

थोड़ा समझकर कदम उठाये!

इस बीमारी ने जो अच्छी आदत डाली है,

उससे हम कभी न भूले!

जो स्वास्थ्य के लिए हो सही,

वही खाएं और पीएं!

बार बार हाथ धोए, चेहरे पर मास्क पहनकर,

अपना और दूसरों का भी जीवन बचाये!


लाशें अब बहुत देख ली,

उम्मीद है अब और नहीं देखनी!

अपनों से कुछ दिनों का फासला,

अब जीवन भर के फासले में नहीं बदलनी!

खुश रहे, स्वस्थ रहे,

यही बात बस अब है कहनी!

जिंदगी लंबी हो या छोटी,

जितनी भी हो सिर्फ ख़ुशी से ही है बितानी!



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