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Heena Ayalani Lachhani

Inspirational Others

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Heena Ayalani Lachhani

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कर्म का फल

कर्म का फल

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संतुष्ट करे जीवन में,

यह ज्ञान कितने योगी बाँट रहे है।

पर इंसान है की अक्सर,

ज्यादा की लालच रख रहा है।


थोड़ा और थोड़ा और मिल जाए,

वक़्त की तरह वो भागता है।

खुश रहना तो जैसे अब भूल गया,

अब नींद में भी अमीरी का स्वप्न देख रहा है।


नए नए तरकीबें आजमा रहा,

अपनों को ही चोट पहुंचा रहा है।

हर कूटनीति वो पार कर गया,

राहों में न जाने

कितने लोगों को ज़ख्म दे रहा है।


आखिर में तो रुकना ही पड़ा,

पीछे मुड़ कर जब उसने देखा।

तब अपनों का साथ भी खो दिया,

फिर भी अभिमानी न पिघला।


शरीर से कमज़ोर हो रहा है, फिर भी

खुद को महान मान रहा है।

छल, कपट से सब पाया है,

खुद को अक्लमंदी का खिताब दे रहा है।


मगर वो कहते है न;


जैसा करोगे वैसा पाओगे,

पाप पुण्य सब यही पाओगे।

झूठ, मोह, माया का सब झाल है,

अंत आखिर तकलीफें देता है.

पछतावे से न दूर होती है मुसीबतें,

सही गलत कर्म का फल तभी आये समझ में।


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