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Neerja Sharma

Abstract

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Neerja Sharma

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किताबें

किताबें

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मनुष्य की अच्छी दोस्त 

एकांत की बेहतर साथी

जब भी कहीं मन ना लगे 

तो साथ जुड़ जाती।


ना कभी देती धोखा

 न कभी होती ख़राब

 जितना ज्यादा रखो संभाल

 उतने ज्यादा चलती साल।


दुनिया भर का ज्ञान भरा

जैसा चाहो सब कुछ है लिखा

 कहते है जमाना बदल गया 

पर किताबों का साथ वही है। 


 टैक्नोलॉजी का जमाना है

 मैसेज चाहें रहें न बाकी 

 साथ देती हमेशा किताबें

 रहती बन कर अच्छा साथी।


दादा खरीदे पोता बरते 

चलती है जीवन के साथ

हर तरह का मनोरंजन कर 

दिमाग को रखती ताजा।


स्वस्थ मनोरंजन हमें देती 

थकान भी दूर कर देती 

बौर न कभी होने देती 

ज्ञान भी भरपूर दे देती।


किताबें केवल देती हैं 

कुछ नहीं लेती हमसे 

पर सहेज कर रखो उनको

इतनी आशा हमसे करती।


कभी इनसे बातें कर देखो 

इनको भी दर्द होता है 

एक पेज भी गर फाड़ो

चरर सा दर्द सुनता है ।


रिश्ता इनसे जन्मों का 

प्यार से सहेजो इनको

इनकी देखरेख भी करो

जैसे अपने तन की करो।


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