किसी को किसी की खबर ही नहीं
किसी को किसी की खबर ही नहीं
सब लोग यहाँ अपनो में गुम हैं,
किसी को किसी की खबर ही नहीं !
ना कोई किसी को याद करता है
किसी को किसी पर यकीन ही नहीं !!
हम किन्हीं को जानते नहीं,
ना उन्हें हम पहचानते हैं !
फिर भी उनकी तस्वीरों को,
अपने सीनों से लगा रखते हैं !!
भीड़ में रहते हुए भी हम
वीरानों के खौफ को भूलते ही नहीं !
ना कोई किसी को याद करता है
किसी को किसी पर यकीन ही नहीं !!
बातें कभी किसी से कौन करे ?
अपनी उपलब्धियों को सिर्फ बताते हैं !
आप सुने या ना सुने हमको
हम रह -रह के अपनी तस्वीर दिखाते हैं !!
मन की बातें हम रोज करते हैं
औरों के विषय में कभी सोचा ही नहीं !
ना कोई किसी को याद करता है
किसी को किसी पर यकीन ही नहीं !!
देशद्रोहियों को पुरस्कार मिलते हैं
देश भक्तों को तिरस्कार मिलते हैं !
आजादी के सपूतों को भुलाकर हम
उनकी रूहों को देश में बेज़ार करते हैं !!
मयस्सर कहाँ सम्मान उनको ?
हम उन्हें फिर कभी पहचानते ही नहीं !
ना कोई किसी को याद करता है
किसी को किसी पर यकीन ही नहीं !!
सब लोग यहाँ अपनों में गुम हैं
किसी को किसी की खबर ही नहीं !
ना कोई किसी को याद करता है
किसी को किसी पर यकीन ही नहीं !!
