किसान
किसान
नसीब कोसता।
किसान अब वह नहीं ।
हल जोतता भरपूर।
किसान बिन देश में खुशहाली नहीं।
बाट जोहता किसान।
सुख-शांति का जीवन जगे।
देश रहे कृषि प्रधान।
स्वीकार करो फिर सुधार करो।
यही तो कहता हर इंसान।
नसीब कोसना, हाथ मलना।
नहीं है कोई सुविचार।
मिट्टी से नाता, मिटटी ही सजाता।
जीवन में किसान खुशहाली है लाता।
मेहनत के सिक्के उछालकर।
किस्मत अपनी नकारता।
है किसान की होली, दिवाली।
जब झूमती है खेतों में गेहूं की बाली।
बाढ़ नहीं बारिश चाहिए।
किसान को खेत की हरियाली चाहिए।
सूखा नहीं संतुलन चाहिए।
प्रकृति में वृक्षों की कतारें चाहिए।
अनाज का हर दाना गर
मुंह का निवाला बन सकता है।
जितना किसान उगाता है।
देश भर पेट सो सकता है।
मेहनत रत।
प्रयासरत ।
हाल बेहाल।
रखता देश खुशहाल।
चाहे हो बारिश की मार।
या हो सूखे से दीदार।
अन्नदाता की पहचान।
हरे भरे खेत खलिहान।
मेहनतकश मजदूर
कब किस्मत को पुकारता है।
वह तो बस मेहनत और सिर्फ
मेहनत करना जानता है।
मेहनत की मिसालें।
किसानों और जवानों की।
देश की माटी कहती कहानी।
इनके बलिदानों की।
उपजाऊ बनाए धरा गर बंजर है।
किसानों ने दिखलाए सुखद मंजर है।
किसान के सम्मान में
अन्न व्यर्थ न गँवाना।
तुममे भी एक किसान है।
यह कभी भूल मत जाना।
बच्चों को मिले वात्सल्य भरपूर।
भगवान ने मां बनाई।
जन-जन खाए भरपेट जरूर।
किसान से खेती करवाई।
अनाज का दाना-दाना
बने मुंह का निवाला।
हर इंसान में
कृषि भावना जगाई।
भटक कर लेकिन इंसान
तूने दुर्गति पाई।
बना ली अपने आसपास
अनगिनत खाई।
बुनियाद हिले इतने तो कमजोर नहीं।
मेहनत के आगे
किस्मत का कोई जोर नहीं।
मेहनत की मिसालें।
किसानों और जवानों की।
देश की माटी कहती कहानी।
इनके बलिदानों की।
उपजाऊ बनाए धरा गर बंजर है।
किसानों ने दिखलाए सुखद मंजर है।
किसान के सम्मान में अन्न व्यर्थ न गँवाना।
तुममे भी एक किसान है।
यह कभी भूल मत जाना।
बच्चों को मिले वात्सल्य भरपूर।
भगवान ने मां बनाई।
जन-जन खाए भरपेट जरूर।
किसान से खेती करवाई।
अनाज का दाना-दाना बने मुंह का निवाला।
हर इंसान में कृषि भावना जगाई।
भटक कर लेकिन इंसान तूने
दुर्गति पाई।
बना ली अपने आसपास अनगिनत खाई।
