Dayawati d
Fantasy
छेड़छाड़ के मुझको भागे।
फिर भी मुझको प्यारा लागे।।
वो तो हर दम करे लड़ाई।
क्या सखि! साजन?
ना सखि भाई।।
शादी में वह रौनक लाए।
खुद आय वो सबको नचाए।।
उसके बोल का ना है मोल ।
क्या सखि! साजन।
नहीं सखि ढोल।।
कहमुकरि
नारी
किसी तरह खिलाएंगे पिलाएंगे पढ़ा लिखा कर बड़ा बनाएंगे किसी तरह खिलाएंगे पिलाएंगे पढ़ा लिखा कर बड़ा बनाएंगे
उन्न गुमसुम होठों के, बिलखता चीखें जो बेज़बान होके भी सुनाई दे गये। उन्न गुमसुम होठों के, बिलखता चीखें जो बेज़बान होके भी सुनाई दे गये।
कई ख़्वाब देखे, थकी ना ये आँखें सितम लाख टूटे, रुकी ना ये साँसें कई ख़्वाब देखे, थकी ना ये आँखें सितम लाख टूटे, रुकी ना ये साँसें
जितना चांद को चांदनी से जितना प्यासे को जल से जितना भंवरे को कली से जितना चांद को चांदनी से जितना प्यासे को जल से जितना भंवरे को कली से
बहन के लिए उसका भाई वह हीरो होता है जो हर मुश्किल में उसके लिए लड़ सकता है बहन के लिए उसका भाई वह हीरो होता है जो हर मुश्किल में उसके लिए लड़ सकता है
खड़ा हूं दहलीज पे , तेरे इंतजार को। ना जाने क्या कहते हैं इस नासमझ प्यार को। खड़ा हूं दहलीज पे , तेरे इंतजार को। ना जाने क्या कहते हैं इस नासमझ प्यार को।
मानव ने प्रकृति से ही जुड़कर अपने दुःख को भुलाना पाया है। मानव ने प्रकृति से ही जुड़कर अपने दुःख को भुलाना पाया है।
जिसे समझ रहा वो "पसंद" है जो मुझे समझ चुका कोई और है। जिसे समझ रहा वो "पसंद" है जो मुझे समझ चुका कोई और है।
रिमझिम बारिश मस्त फुहार फूलों की है अजब बाहर रिमझिम बारिश मस्त फुहार फूलों की है अजब बाहर
काले जादू के नहीं बल्कि काले श्याम के जादू में। काले जादू के नहीं बल्कि काले श्याम के जादू में।
क्योंकि हर रात के बाद एक सुबह ज़रूर आएगा। क्योंकि हर रात के बाद एक सुबह ज़रूर आएगा।
सुबह जल्दी से उठते हैं काम, रात को देर तक करें काम। सुबह जल्दी से उठते हैं काम, रात को देर तक करें काम।
तुमने छोड़ा था साथ मेरा मैंने किसी का हाथ थामा नहीं तुमने छोड़ा था साथ मेरा मैंने किसी का हाथ थामा नहीं
कदंब की डालियों पर बैठा कन्हैया शाम में जंगल से घर लौटते बांसुरी बजाए कदंब की डालियों पर बैठा कन्हैया शाम में जंगल से घर लौटते बांसुरी बजाए
ऐसी प्रभु लीला हो जाए बचपन सा जीवन हो जाए ऐसी प्रभु लीला हो जाए बचपन सा जीवन हो जाए
मन में लहरों की तरह भाव आ जाते है जीने की चाह मर जाती है मन में लहरों की तरह भाव आ जाते है जीने की चाह मर जाती है
तुमसे मिलने का अहसास है ऐसा बता नहीं सकते हम और है कैसा-कैसा ? तुमसे मिलने का अहसास है ऐसा बता नहीं सकते हम और है कैसा-कैसा ?
बड़े बड़े जहाज चुनौती रुप इस कश्ती को हिलाते, पर नाविक रुपी मुखिया इसका मुंहतोड़ जवाब बड़े बड़े जहाज चुनौती रुप इस कश्ती को हिलाते, पर नाविक रुपी मुखिया इसका मुंहत...
इंद्रधनुष के फीके क्यों रंग, प्रेम गली के रास्ते क्यों तंग इंद्रधनुष के फीके क्यों रंग, प्रेम गली के रास्ते क्यों तंग
उम्मीदों का टूटा अभी सिलसिला नहीं अब तक तुमसा हमसफर मिला नहीं। उम्मीदों का टूटा अभी सिलसिला नहीं अब तक तुमसा हमसफर मिला नहीं।