STORYMIRROR

Dayawati d

Fantasy

2  

Dayawati d

Fantasy

कहमुकरि

कहमुकरि

1 min
135

छेड़छाड़ के मुझको भागे।

फिर भी मुझको प्यारा लागे।।

वो तो हर दम करे लड़ाई।

क्या सखि! साजन? 

ना सखि भाई।।


शादी में वह रौनक लाए।

खुद आय वो  सबको नचाए।। 

उसके बोल का ना है मोल ।

क्या सखि! साजन।

 नहीं  सखि ढोल।।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Dayawati d

Similar hindi poem from Fantasy