STORYMIRROR

Fahima Farooqui

Abstract Others

3  

Fahima Farooqui

Abstract Others

ख़्वाहिशों का घर

ख़्वाहिशों का घर

1 min
184

ख़्वाहिशों का घर बनाने से पहले।

कमाना भी सीखो गवाने से पहले।


बहुत तड़पना पड़ता है इश्क़ में,

सोच लेना दिल लगाने से पहले।


ख़ुद को भी एक बार परख लेना,

किसी ओर को आजमाने से पहले।


आईना ख़ुद को भी बता देना,

दूसरे के ऐब दिखाने से पहले।


ख़ुदा की हर आमाल पे नज़र है,

सोच लेना हराम कमाने से पहले।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract