STORYMIRROR

Sanket Potphode

Romance

4.8  

Sanket Potphode

Romance

ख़्वाब

ख़्वाब

1 min
858


रोज़ इक ख़्वाब टूट जाता है

जब तुम्हें दूर जाता देखता हूँ

एक पल जीने की चक्कर में

मैं रोज थोड़ा-थोड़ा मरता हूँ।


बस तुम्हारी एक झलक के लिए

मैं इन सड़कों पर घंटों बिताता हूँ

नतीजा मुझे मालुम है फिर भी

रोज यहाँ मरने आ जाता हूँ।


ये रोज का मरना भी कुबूल मुझे

तेरे लिये ये जान जो हाज़िर थी

पर मेरी इन यादों का मैं क्या करूँ

जो तुमने जिंदा ही दफन करी थी।


मेरे हिस्से की यादों को लेकर जाना

हम यही एक गुजारिश कर रहे

साथ रहना हमारे नसीब में नहीं

कम से कम हमारी यादें तो साथ रहे।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance