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Heena Shaikh

Abstract Romance Tragedy

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Heena Shaikh

Abstract Romance Tragedy

खास

खास

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खास वो कोई तस्वीर होता

रख लेते उसे अपने पास

तकदीर बना के,


ढूंढ़ता वो किसी और को अपना बनाने,

हम खुदको उसका बना बैठे।


रूठ भी जाए उससे तो

हम मान भी खुद ही जाते।


खोने का डर है उसे इसलिए

किसी और से उसकी चाहत नहीं चाहते।


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