STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Abstract

3  

Mukesh Bissa

Abstract

कहानी हो गए

कहानी हो गए

1 min
154

विवाद करने वाले नहीं है अब

शोर करते थे परिंदे सो गए।


कोई आहट कोई दस्तक नहीं

भूली बिसरी इक कहानी हो गए।


मुद्दत से हमारे आईने पे धूल थी

आँसुओं के सील उस को धो गए।


वो रोता था, वो हँसाता भी था

अब ज़माना हो गया उस को गए।


सुनते थे लोरियां मां बाप की

आधुनिकता की कहानी में खो गए।


मिल बैठते थे अपने दोस्तों संग

अपनी अकेली जिंदगानी में सो गए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract