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Brijlala Rohanअन्वेषी

Inspirational

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Inspirational

कदम मिलाकर चलना होगा

कदम मिलाकर चलना होगा

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विपदा के पाश में,मानवता के आश में ,

साथ मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर एक सिरे में ढलना होगा, 

कदम मिलाकर चलना होगा।                                          

अपने- पराये की भेद किये बिना ,

हर जरूरतमंद की जरूरत को परहित की कसौटी पर तोलना होगा,

मानवता की भलाई में हमें अंतिम समय तक अपनी लड़ाई खुद मिलकर लड़ना होगा 

कदम मिलाकर चलना होगा।                          

चारों ओर छायी है घनघोर घटाएं ,गहरी रात की डरावना अंधियारा  

रोशनी की चाह में न जाने टिकी हैं कितनी आशाएं         

परिश्रम की वेदी पर उद्योग -निरत -नित रमना होगा ,

कदम मिलाकर चलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।          

इस अदृश्य दुश्मन से करे हम मिलकर मुकाबला ,          

इसी में है पूरी मानवता की भला ,                      

अधर में जा रही नैया को ,गंगा पार अब करना होगा          

मानव जाति की रक्षा में सर्वस्व न्यौछावर करना होगा   

कदम मिलाकर चलना होगा। 

एक-दूसरे के गिले शिकवे और अनबन को नजरअंदाज अब करना होगा।                                      

अस्तित्व को बचाने के लिए अपनी कड़ाई से कमर कसना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा। ।


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