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Manisha Wandhare

Abstract Romance

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Manisha Wandhare

Abstract Romance

कच्ची धूप सी...

कच्ची धूप सी...

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कच्ची धूप सी तू दिल पे है छाई,

मेरी आँखों पे तेरी ही परछाई ,

तू समा गई ऐसे दिल में मेरे ,

हर जगह देखूं तेरी ही परछाइयाँ ...

अब तो घटा बरसे जब भी,

हँसे तो तू खिल उठे ,

दिल की सारी शोखीयाँ ...


सांवरीया सावन तेरा जो बरस गया,

तो मैं बरसातों में तेरी ही भीगूँ ,

खोया मैं तेरी ही यादों में ,

रोज तुझसे ही आन मिलूँ ...

कभी इश्क की गलियों में चल के देखिये,

रात दिन का पता ही नहीं चलेगा...

रात के अंधेरों में ,

तेरी रोशनी चाँद सी ,

गुनगुनाये जब हवा,

तू लहरें दिल पे फुहारों सी ...

चंचल तेरी सारी अदा ,

मैं तो तुझ में ही पूरा खोया ...


धुन - केसरीया तेरा इश्क है पिया ...


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