कच्ची धूप सी...
कच्ची धूप सी...
कच्ची धूप सी तू दिल पे है छाई,
मेरी आँखों पे तेरी ही परछाई ,
तू समा गई ऐसे दिल में मेरे ,
हर जगह देखूं तेरी ही परछाइयाँ ...
अब तो घटा बरसे जब भी,
हँसे तो तू खिल उठे ,
दिल की सारी शोखीयाँ ...
सांवरीया सावन तेरा जो बरस गया,
तो मैं बरसातों में तेरी ही भीगूँ ,
खोया मैं तेरी ही यादों में ,
रोज तुझसे ही आन मिलूँ ...
कभी इश्क की गलियों में चल के देखिये,
रात दिन का पता ही नहीं चलेगा...
रात के अंधेरों में ,
तेरी रोशनी चाँद सी ,
गुनगुनाये जब हवा,
तू लहरें दिल पे फुहारों सी ...
चंचल तेरी सारी अदा ,
मैं तो तुझ में ही पूरा खोया ...
धुन - केसरीया तेरा इश्क है पिया ...

