STORYMIRROR

ATAL KASHYAP

Tragedy Inspirational

3  

ATAL KASHYAP

Tragedy Inspirational

कैंडल-मार्च

कैंडल-मार्च

1 min
128

देख रहा था दिन एक टी.वी. पर समाचार,  

सयानी होती बिटिया भी समझ रही थी खबरों का सार,

एकाएक बलात्कार से जुड़ा कैंडल-मार्च का विवरण आया,  

चाहकर भी टी.वी. का चैनल न बदल पाया,

देखकर मुझसे उसने प्रश्न दाग डाला, क्या,

कैंडल-मार्च से सिलसिला थम जाएगा,  

वहशी-दरिंदों का पत्थर-दिल क्या मोम बन जाएगा,  

पापा, कैंडल-मार्च नहीं ऐसे लोगों का जब सैंडिल-मार्च होगा,

तभी बलात्कार जैसी घटनाओं पर अंकुश आएगा,  

सुनकर बात बिटिया की मुझे फक्र हो आया,

उस दिन बिटिया में मुझे चंडी का रूप नजर आया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy