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ATAL KASHYAP

Tragedy Inspirational

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ATAL KASHYAP

Tragedy Inspirational

कैंडल-मार्च

कैंडल-मार्च

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देख रहा था दिन एक टी.वी. पर समाचार,  

सयानी होती बिटिया भी समझ रही थी खबरों का सार,

एकाएक बलात्कार से जुड़ा कैंडल-मार्च का विवरण आया,  

चाहकर भी टी.वी. का चैनल न बदल पाया,

देखकर मुझसे उसने प्रश्न दाग डाला, क्या,

कैंडल-मार्च से सिलसिला थम जाएगा,  

वहशी-दरिंदों का पत्थर-दिल क्या मोम बन जाएगा,  

पापा, कैंडल-मार्च नहीं ऐसे लोगों का जब सैंडिल-मार्च होगा,

तभी बलात्कार जैसी घटनाओं पर अंकुश आएगा,  

सुनकर बात बिटिया की मुझे फक्र हो आया,

उस दिन बिटिया में मुझे चंडी का रूप नजर आया।


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