क़ैद कविता
क़ैद कविता
वाइन बोतल में क़ैद एक कविता है
मेरे होंठ छूते ही
वाइन बोलने लगती है।
मैं इस जिस्म में क़ैद एक कविता हूँ
तेरे होंठ छूते ही
मैं बोलने लगती हूँ।
वाइन बोतल में क़ैद एक कविता है
मेरे होंठ छूते ही
वाइन बोलने लगती है।
मैं इस जिस्म में क़ैद एक कविता हूँ
तेरे होंठ छूते ही
मैं बोलने लगती हूँ।