Astha Trivedi
Classics
काश
शब्द बोलने में
जितना सरल होता है,
पर असलियत में
वो उतना ही
मुश्किल भी होता है।
इस "काश" में
इतनी ताकत
ये इंसान को
हँसा भी सकता है
और रुला भी सकता है।
धीरे से मुस्क...
ज़िन्दगी की र...
लांसनायक हेमर...
सच्चे प्रेम में नहीं होता है कोई स्वार्थ : इस लिए जुदाई के समय कभी मत रोना ! सच्चे प्रेम में नहीं होता है कोई स्वार्थ : इस लिए जुदाई के समय कभी मत रोना !
हम तो समझे थे... अल्लाह और मंजर बंद आँखों से ही नजर आते हैं। हम तो समझे थे... अल्लाह और मंजर बंद आँखों से ही नजर आते हैं।
आय सहाय करो त्रिपुरारी। मृत्यु अकाल न होय हमारी।। आय सहाय करो त्रिपुरारी। मृत्यु अकाल न होय हमारी।।
दिन रात मेहनत करती हैं, इतनी शक्तिमान व्यक्ति को नमन। दिन रात मेहनत करती हैं, इतनी शक्तिमान व्यक्ति को नमन।
कहाँ आता अब ऐसा दिन यार अब तो पुरा बदल चुका संसार। कहाँ आता अब ऐसा दिन यार अब तो पुरा बदल चुका संसार।
बड़ी ही खुशामद से मिलने लगे हो आजकल, इतनी जल्दी ये जुदाई की घड़ी कैसे आ गयी ! बड़ी ही खुशामद से मिलने लगे हो आजकल, इतनी जल्दी ये जुदाई की घड़ी कैसे आ गयी !
तेरी सखी, तेरी प्रेरणा तेरी माँ मैं हूं ! तेरी सखी, तेरी प्रेरणा तेरी माँ मैं हूं !
कर गए हैं कायल इस दुनिया को, अपनी कला कृति से सारे ये।। कर गए हैं कायल इस दुनिया को, अपनी कला कृति से सारे ये।।
खुद के अस्तित्व को भी प्रेमी के रूप में बदल ही जाती है। खुद के अस्तित्व को भी प्रेमी के रूप में बदल ही जाती है।
ठीक ही है तुम खुद को बदल, रीत दे रहे शठे शाठ्यम समाचरेत् की, लीक ले रहे। ठीक ही है तुम खुद को बदल, रीत दे रहे शठे शाठ्यम समाचरेत् की, लीक ले रहे।
कर दिया मैंने उनसे खुलके मोहब्बत का इज़हार ! कर दिया मैंने उनसे खुलके मोहब्बत का इज़हार !
बहुत लेकर जमाने से चले जाते हैं लोग। बहुत कुछ देकर मैं जाऊं मेरी दीवानगी है। बहुत लेकर जमाने से चले जाते हैं लोग। बहुत कुछ देकर मैं जाऊं मेरी दीवानगी है।
हमसफर हमनवा तुझे ही बनाना है हाले दिल मेरा प्रिय तुम्हें सुनाना है। हमसफर हमनवा तुझे ही बनाना है हाले दिल मेरा प्रिय तुम्हें सुनाना है।
अब भी मन की दहलीज पर हैं खड़ी, उनकी मुस्कान अब भी मोतियों की लड़ी ! अब भी मन की दहलीज पर हैं खड़ी, उनकी मुस्कान अब भी मोतियों की लड़ी !
मगर रोटी का भी जुगाड न हो पाए तो क्या होता है। मगर रोटी का भी जुगाड न हो पाए तो क्या होता है।
अर्जी है सरकारी हसरत से देखे है रस्ता ख्वाबों के आंगन में। अर्जी है सरकारी हसरत से देखे है रस्ता ख्वाबों के आंगन में।
बन बन भटके मन बंजारा कुछ यादों की गठरी लेकर। बन बन भटके मन बंजारा कुछ यादों की गठरी लेकर।
सब को बुलाओ कोई ताबीज बनवाओ इस देश की नजर उतरवाओ। सब को बुलाओ कोई ताबीज बनवाओ इस देश की नजर उतरवाओ।
ना दुनिया भर का जमघट चाहिए बस माँ का आशीर्वाद सदा साथ चाहिए। ना दुनिया भर का जमघट चाहिए बस माँ का आशीर्वाद सदा साथ चाहिए।
अंततः लौटे, इसी जमीं पर जिसमें थी उनके नीड़ की जड़ें।। अंततः लौटे, इसी जमीं पर जिसमें थी उनके नीड़ की जड़ें।।